पांच साल पहले मैं जिस कंपनी में काम करता था, वहां एक सुपरवाइजर थे शर्मा जी. शर्मा जी की खासियत थी कि उनके पास कोई काम नहीं होता था, बावजूद इसके कोई भी उन्हें कुछ भी काम बोलता, तो उनका यही जवाब होता था कि अभी बिजी हूं, बाद में देखता हूं. उसके बाद बड़बड़ाते भी कि जिसको देखो, मुझे ही काम बोलता है. हमलोगों ने उनका नाम ‘बिजी फॉर नथिंग’ रख दिया था. ऐसे ‘बिजी फॉर नथिंग’ लोग मुङो हर जगह मिले.
आपके ऑफिस में भी शायद ऐसा कोई ‘बिजी फॉर नथिंग’ होगा. ऐसे लोग हमेशा बिजी रहते हैं. इनके हर अधूरे काम की वजह एक ही होती है कि वे बिजी थे. ऐसे लोगों के लिए बिजी होना एक ऐसा बहाना है, जिसका वे अपनी हर गलत बात, हर गलत आदत की रक्षा में इस्तेमाल करते हैं. वास्तव में बिजी होना और बिजी होने की आदत का शिकार होना दो बिल्कुल अलग बातें हैं. जो व्यक्ति 10 कामों में से 8 कामों के न होने का कारण अपने को बिजी होना बताये तो समझ लीजिए कि वह कामचोरी कर रहा है और काम करना ही नहीं चाहता. वह व्यक्ति व्यस्त नहीं, व्यस्तता के मनोविकार का शिकार है. आमतौर पर ये अपने दफ्तर पर बोझ होते हैं, क्योंकि ये बेहद अनुत्पादक होते हैं. इन लोगों की नौकरी अगर सीनियर के भरोसे चलती भी रहती है, तब भी बॉस उनसे खुश नहीं रहते, क्योंकि यह बात हमेशा उनके दिलो दिमाग में रहती है कि अमुक व्यक्ति दफ्तर पर बोझ है.
अगर किसी व्यक्ति को अपने अधूरे कामों के लिए बहाने बनाने की आदत हो गयी है तो फिर उसके अंदर का प्रोफेशनलिज्म खत्म हो जाता है. उसकी ग्रोथ रु क जाती है और किसी नौकरी में रहते हुए यह सबसे बुरी स्थिति है कि आपकी उपस्थिति या अनुपस्थिति का कोई असर ऑफिस के काम पर न पड़े. अगर आप भी ‘बिजी फॉर नथिंग’ में से एक हैं, तो थोड़ा समय निकालिए और यह जानिए कि सबसे अहम बात यही है कि अपने प्रोफेशनलिज्म को कायम रखते हुए छोटी-छोटी बातों में बहाने बनाने से बचें और ऑफिस में खुद का महत्व साबित करने के प्रयास में जुट जाएं. यह बहुत मुश्किल नहीं, शुरुआत करके देखें.
बात पते कीः-
-अगर किसी व्यक्ति को अपने अधूरे कामों के लिए बहाने बनाने की आदत है, तो फिर उसके अंदर का प्रोफेशनलिज्म खत्म हो जाता है.
-छोटी-छोटी बातों में बहाने बनाने से बचें और ऑफिस में खुद का महत्व साबित करने के प्रयास में जुट जाएं.
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