किसी भी प्रोजेक्ट की सफलता या विफलता बहुत हद तक उसके लीडर पर निर्भर करती है. लीडर पर भरोसा करके ही प्रोजेक्ट का दायित्व उसे सौंपा जाता है. संस्थान हमेशा यही चाहता है कि लीडर संस्थान को अपना बेस्ट दे, तो दूसरी ओर टीम के बाकी सदस्य चाहते हैं कि वे अपने लीडर से कुछ न कुछ सीखते रहें. ऐसे में लीडर पर दोहरी जिम्मेवारी होती है. एक तो उसे संस्थान को बेस्ट देना होता है और दूसरा उसे टीम के सदस्यों को बेस्ट देने के लिए प्रेरित करना होता है.
अगर आप एक लीडर हैं और चाहते हैं कि खुद में लीडरशिप क्वालिटी को बनाये रखें, तो आपको अपनी कमियों पर भी गौर करते रहना होगा. आपको दूसरों की अच्छाइयों को उभारना है. हो सकता है कि वाकई आपके टीम मेंबर अच्छा नहीं कर रहे हों, पर यह आपका दायित्व है कि उन्हें प्रेरित करें, उनमें जोश भरें. इसके लिए जरूरी है कि आप अपने दायरे से बाहर निकलें. खुद को दर्पण के सामने रख कर पता करते रहें कि कहीं मैं आत्ममुग्धता का शिकार तो नहीं. दूसरों के काम को रिजेक्ट कर देना दुनिया का सबसे आसान काम है, क्योंकि अगर ठान लिया है आपने कि गलतियां निकालनी हैं, तो हजार कारण मिल जायेंगे.
अपने अच्छे काम के लिए खुद की पीठ जरूर थपथपाएं.
खुद को प्यार करना अच्छा है, लेकिन हमेशा दूसरों को कम आंकना सही नहीं. अगर आप ही सकारात्मक नहीं रहेंगे, तो टीम में आत्मविश्वास कहां से आयेगा. आपको टीम के सदस्यों का सच्चा हितैषी बनना होगा और उनके काम का विश्लेषण ऐसे करना होगा कि आप केंद्र में न रहें, अन्यथा टीम के सदस्य आपके सामने तो आपकी तारीफ करेंगे, लेकिन पीठ पीछे आपकी आलोचना ही करेंगे, जो अंतत: प्रोजेक्ट के लिए अच्छा नहीं होगा. याद रखें कि आप लीडर हैं. आपको हर बाधा को पार करना है.
नौकरी बचाने के चक्कर में न रहें. हमेशा लर्निंग प्रोसेस में रहें. आपसे पहले भी इस टीम को कोई और लीड कर रहा था और आपके बाद भी कोई न कोई लीड करेगा. यह कतई न सोचें कि आपके बिना काम नहीं चल सकता.
बात पते कीः-
-खुद को प्यार करना अच्छा है, लेकिन हमेशा दूसरों को कम आंकना सही नहीं.
-आपको टीम के सदस्यों का सच्चा हितैषी बनना होगा और उनके काम का विश्लेषण ऐसे करना होगा कि आप केंद्र में न रहें.
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