कई बार आपने महसूस किया होगा कि कोई व्यक्ति आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ता, लेकिन आपको वह बिल्कुल भी पसंद नहीं आता. वहीं कुछ लोग आपकी बिल्कुल परवाह नहीं करते, लेकिन आपकी नजर में वे आपके करीब हैं.
एक स्टेज तक तो यह ठीक है, लेकिन जब आप एक जिम्मेवारी भरी जगह पर आते हैं, तो आपको सभी के साथ समान रूप से स्नेहमय व्यवहार रखना चाहिए. यह आपकी उदारता और बड़प्पन को बताता है. जब मैं पहली बार किसी ब्रांच का हेड बन कर जा रहा था, तो मेरे बॉस ने मुझसे एक ही बात कही- वहां जाते ही सेकेंड इंचार्ज से लेकर ऑफिस ब्वॉय तक का ध्यान रखना, हमेशा उनका हालचाल लेते रहना, ताकि वे तुम्हें अपने करीब समङों और हमेशा बेस्ट देने की कोशिश करें.
ईश्वरचंद्र विद्यासागर समाज के हर वर्ग के प्रति समान भाव रखते थे. उनके घर में घरेलू कामकाज के लिए एक नौकर था. विद्यासागर उसके प्रति काफी स्नेह रखते थे और उसके साथ बिल्कुल अपने परिवार के सदस्य की तरह ही व्यवहार करते थे. एक दिन वह अपने मकान की सीढ़ियों से उतर रहे थे कि उन्होंने देखा उनका नौकर सीढ़ियों पर ही सो रहा है और उसके हाथ में एक पत्र है.
विद्यासागर ने धीरे से उसके हाथ से पत्र निकाल कर पढ़ा तो उन्हें पता चला कि उसके घर से कोई दुखद समाचार आया था. विद्यासागर ने देखा कि नौकर के चेहरे पर आंसू की एक लकीर थी, शायद वह रोते-रोते सो गया था. वह जल्दी से हाथ वाला पंखा लाकर उसे झलने लगे, ताकि नौकर आराम से सो सके. उसी समय उनका एक मित्र वहां आया. यह दृश्य देख कर वह चकित होकर बोला - आप तो हद कर रहे हैं. सात-आठ रु पये की पगार वाले नौकर की सेवा में लगे हैं.
विद्यासागर ने कहा-मेरे पिताजी भी सात-आठ रु पये मासिक ही पाते थे. मुङो याद है , एक दिन वह चलते-चलते सड़क पर अचेत हो गये थे, तब एक राहगीर ने पानी पिला कर उनकी सेवा की थी. अपने इस नौकर में मैं अपने स्वर्गीय पिता की वही छवि देख रहा हूं. यह दुनिया तभी बेहतर ढंग से चल पायेगी जब हर व्यक्ति एक-दूसरे को अपना समङो और उसकी सहायता करे.
बात पते कीः-
-सभी के साथ समान रूप से स्नेहमय व्यवहार रखना चाहिए. यह आपकी उदारता और बड़प्पन को बताता है.
-अगर आप दिल से अपने कर्मचारियों का ध्यान रखते हैं, तो यकीन मानिए आपके कर्मचारी भी बेस्ट देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
ईश्वरचंद्र विद्यासागर समाज के हर वर्ग के प्रति समान भाव रखते थे. उनके घर में घरेलू कामकाज के लिए एक नौकर था. विद्यासागर उसके प्रति काफी स्नेह रखते थे और उसके साथ बिल्कुल अपने परिवार के सदस्य की तरह ही व्यवहार करते थे. एक दिन वह अपने मकान की सीढ़ियों से उतर रहे थे कि उन्होंने देखा उनका नौकर सीढ़ियों पर ही सो रहा है और उसके हाथ में एक पत्र है.
विद्यासागर ने धीरे से उसके हाथ से पत्र निकाल कर पढ़ा तो उन्हें पता चला कि उसके घर से कोई दुखद समाचार आया था. विद्यासागर ने देखा कि नौकर के चेहरे पर आंसू की एक लकीर थी, शायद वह रोते-रोते सो गया था. वह जल्दी से हाथ वाला पंखा लाकर उसे झलने लगे, ताकि नौकर आराम से सो सके. उसी समय उनका एक मित्र वहां आया. यह दृश्य देख कर वह चकित होकर बोला - आप तो हद कर रहे हैं. सात-आठ रु पये की पगार वाले नौकर की सेवा में लगे हैं.
विद्यासागर ने कहा-मेरे पिताजी भी सात-आठ रु पये मासिक ही पाते थे. मुङो याद है , एक दिन वह चलते-चलते सड़क पर अचेत हो गये थे, तब एक राहगीर ने पानी पिला कर उनकी सेवा की थी. अपने इस नौकर में मैं अपने स्वर्गीय पिता की वही छवि देख रहा हूं. यह दुनिया तभी बेहतर ढंग से चल पायेगी जब हर व्यक्ति एक-दूसरे को अपना समङो और उसकी सहायता करे.
बात पते कीः-
-सभी के साथ समान रूप से स्नेहमय व्यवहार रखना चाहिए. यह आपकी उदारता और बड़प्पन को बताता है.
-अगर आप दिल से अपने कर्मचारियों का ध्यान रखते हैं, तो यकीन मानिए आपके कर्मचारी भी बेस्ट देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
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