कुछ साल पहले रजनीश अपनी नौकरी से बेहद परेशान था. वह अपने साथियों के बीच बराबर यही कहता था कि कुछ अपना काम-धंधा शुरू किया जाये. इस नौकरी से तो अच्छा है, कि कुछ कम पैसे भी कमा लें, लेकिन संतुष्टि तो होगी, इतना तनाव तो नहीं होगा.
बस कुछ पैसे का इंतजाम हो जाये. संजय उसकी बातें कई दिनों से सुन रहा था. उसने रजनीश से कहा, रजनीश बिजनेस करनेवालों की मानसिकता अलग होती है. वे पैसा जमा होने का इंतजार नहीं करते. उनके पास जो है, वे उसी में काम शुरू कर देते हैं.
विश्वव्यापी मंदी और कॉस्ट कटिंग के इस दौर में आजकल ज्यादातर ऑफिस में ऐसी बातें सुनने को मिल जायेंगी. लोग चाहते हैं कि उनका अपना काम हो. असल में वे चाहते नहीं हैं. यह उनका डर है, जो उन्हें ऐसा सोचने पर मजबूर कर रहा है. उनकी बातों से ऐसा लगता है, जैसे बिजनेस करना बेहद आसान है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह बेहद कठिन है, लेकिन जिस आसानी से हम इसे नौकरी का विकल्प मानने लगते हैं, यह उतना भी आसान नहीं है.
अगर आप वर्तमान नौकरी में अपनी नौकरी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इसके तनाव को बरदाश्त नहीं कर पा रहे हैं, तो आप यह कैसे उम्मीद करते हैं कि आप बिजनेस में इन संघर्षो से मुकाबला कर लेंगे. वहां तो आपको नौकरी से ज्यादा संघर्ष करना पड़ेगा. सोचिए, आप अगर कहीं काम कर रहे हैं, तो आप इस बारे में शायद ही सोचते होंगे कि कंपनी में जिसका पैसा लगा है, उसे रिटर्न कैसे और कितना मिलेगा. आपको तो एक काम एसाइन कर दिया गया है और आप वह करते हैं, लेकिन बिजनेस में तो आपको सब कुछ खुद ही देखना है.
बिजनेस के लिए मैं यहां कतई हतोत्साहित नहीं कर रहा हूं, लेकिन नौकरी के विकल्प के रूप में इसे न देखें. बिजनेस तभी शुरू करें, जब आपको लगे कि आप वर्तमान नौकरी से ज्यादा तनाव ले सकते हैं. जिस दिन ऐसा महसूस होगा, उस दिन कुछ खास करने के लिए आप बिजनेस में उतरेंगे और तब सफल होने से कोई रोक भी नहीं सकता, लेकिन फिलहाल वर्तमान नौकरी ही भली. इसी में अपना बेस्ट दें. इस समय कंपनी को भी आपके बेस्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है.
बस कुछ पैसे का इंतजाम हो जाये. संजय उसकी बातें कई दिनों से सुन रहा था. उसने रजनीश से कहा, रजनीश बिजनेस करनेवालों की मानसिकता अलग होती है. वे पैसा जमा होने का इंतजार नहीं करते. उनके पास जो है, वे उसी में काम शुरू कर देते हैं.
विश्वव्यापी मंदी और कॉस्ट कटिंग के इस दौर में आजकल ज्यादातर ऑफिस में ऐसी बातें सुनने को मिल जायेंगी. लोग चाहते हैं कि उनका अपना काम हो. असल में वे चाहते नहीं हैं. यह उनका डर है, जो उन्हें ऐसा सोचने पर मजबूर कर रहा है. उनकी बातों से ऐसा लगता है, जैसे बिजनेस करना बेहद आसान है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह बेहद कठिन है, लेकिन जिस आसानी से हम इसे नौकरी का विकल्प मानने लगते हैं, यह उतना भी आसान नहीं है.
अगर आप वर्तमान नौकरी में अपनी नौकरी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इसके तनाव को बरदाश्त नहीं कर पा रहे हैं, तो आप यह कैसे उम्मीद करते हैं कि आप बिजनेस में इन संघर्षो से मुकाबला कर लेंगे. वहां तो आपको नौकरी से ज्यादा संघर्ष करना पड़ेगा. सोचिए, आप अगर कहीं काम कर रहे हैं, तो आप इस बारे में शायद ही सोचते होंगे कि कंपनी में जिसका पैसा लगा है, उसे रिटर्न कैसे और कितना मिलेगा. आपको तो एक काम एसाइन कर दिया गया है और आप वह करते हैं, लेकिन बिजनेस में तो आपको सब कुछ खुद ही देखना है.
बिजनेस के लिए मैं यहां कतई हतोत्साहित नहीं कर रहा हूं, लेकिन नौकरी के विकल्प के रूप में इसे न देखें. बिजनेस तभी शुरू करें, जब आपको लगे कि आप वर्तमान नौकरी से ज्यादा तनाव ले सकते हैं. जिस दिन ऐसा महसूस होगा, उस दिन कुछ खास करने के लिए आप बिजनेस में उतरेंगे और तब सफल होने से कोई रोक भी नहीं सकता, लेकिन फिलहाल वर्तमान नौकरी ही भली. इसी में अपना बेस्ट दें. इस समय कंपनी को भी आपके बेस्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है.
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