आज युवा पीढ़ी तेजी से सफलता प्राप्त करना चाहती है. ज्यादातर युवाओं को इतनी जल्दी होती है कि वे एक ही काम में लगातार प्रयास को महत्व ही नहीं देते हैं. उन्हें लगता है कि तुरंत अगर सफलता न मिली, तो दूसरा काम शुरू करो, नहीं तो कैरियर की रेस में पिछड़ जायेंगे.
दूसरे काम में भी आशा अनुरूप सफलता नहीं मिली तो वे तीसरा काम पकड़ लेते हैं. इसी तरह से अपने काम बदलते रहते हैं. कुछ लोग काम बदल कर सफल भी होते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग थक कर हार जाते हैं. बहुत सारी उपलिब्धयां एक साथ पाने की चाहत अथवा एक कार्य से शीघ्रता शीघ्र फल की चाह व्यक्ति में बेहद तनाव पैदा कर देती है, जिससे कार्यक्षमता हो जाती है. एक बार एक राजा को अपने लिए एक अतिविश्वसनीय सेनापति की जरूरत थी. उसने चार योग्य पुरुषों का चयन किया. उन्हें महल के कुएं से पानी लाकर एक ड्रम भरने का काम दिया. इसके लिए उन्हें बांस की बेंत से बनी बाल्टी दी गयी. जब कुएं से पानी खींचा जाता, तो बाल्टी ऊपर आते तक उसमें केवल दो चुल्लू पानी रह जाता था, वह भी 2-4 कदम चलने पर रिस जाता था. पहले व्यक्ति ने 10-12 बार प्रयास किया और यह कह कर बैठ गया कि राजा ने असंभव कार्य दिया है.
दूसरा व्यक्ति आधा घंटे तक प्रयास करते रहा और उसे भी पहले व्यक्ति की बात सही लगने लगी. तीसरे और चौथे व्यक्ति लगातार प्रयास करते रहे. लगातार प्रयास से कुएं से लगभग 40-50 कदम तक चलने पर बाल्टी खाली हो जाती थी. सैकड़ों बार के प्रयास के बाद तीसरे व्यक्ति ने भी हिम्मत छोड़ दी. वह अन्य दो के पास बैठ गया. चौथे व्यक्ति ने प्रयास नहीं छोड़ा. उसे विश्वास था कि राजा ने संभव कार्य दिया है.
लगातार करने से ही सफलता मिलेगी. दोपहर बाद उसने देखा कि बांस की बेंत फूलने लगी है और छोटे छिद्र बंद होते जा रहे हैं और पानी ज्यादा दूरी तक ले जाया जा सकता है. शाम होते तक बांस की बेंत फूल गयी और पानी का रिसना बहुत कम हो गया. उस बाल्टी से कुछ पानी ड्रम में डाला जा सका. रात होते तक पानी का ड्रम भर गया और उस चौथे व्यक्ति को राजा द्वारा सेनापति नियुक्त कर दिया गया.
दूसरे काम में भी आशा अनुरूप सफलता नहीं मिली तो वे तीसरा काम पकड़ लेते हैं. इसी तरह से अपने काम बदलते रहते हैं. कुछ लोग काम बदल कर सफल भी होते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग थक कर हार जाते हैं. बहुत सारी उपलिब्धयां एक साथ पाने की चाहत अथवा एक कार्य से शीघ्रता शीघ्र फल की चाह व्यक्ति में बेहद तनाव पैदा कर देती है, जिससे कार्यक्षमता हो जाती है. एक बार एक राजा को अपने लिए एक अतिविश्वसनीय सेनापति की जरूरत थी. उसने चार योग्य पुरुषों का चयन किया. उन्हें महल के कुएं से पानी लाकर एक ड्रम भरने का काम दिया. इसके लिए उन्हें बांस की बेंत से बनी बाल्टी दी गयी. जब कुएं से पानी खींचा जाता, तो बाल्टी ऊपर आते तक उसमें केवल दो चुल्लू पानी रह जाता था, वह भी 2-4 कदम चलने पर रिस जाता था. पहले व्यक्ति ने 10-12 बार प्रयास किया और यह कह कर बैठ गया कि राजा ने असंभव कार्य दिया है.
दूसरा व्यक्ति आधा घंटे तक प्रयास करते रहा और उसे भी पहले व्यक्ति की बात सही लगने लगी. तीसरे और चौथे व्यक्ति लगातार प्रयास करते रहे. लगातार प्रयास से कुएं से लगभग 40-50 कदम तक चलने पर बाल्टी खाली हो जाती थी. सैकड़ों बार के प्रयास के बाद तीसरे व्यक्ति ने भी हिम्मत छोड़ दी. वह अन्य दो के पास बैठ गया. चौथे व्यक्ति ने प्रयास नहीं छोड़ा. उसे विश्वास था कि राजा ने संभव कार्य दिया है.
लगातार करने से ही सफलता मिलेगी. दोपहर बाद उसने देखा कि बांस की बेंत फूलने लगी है और छोटे छिद्र बंद होते जा रहे हैं और पानी ज्यादा दूरी तक ले जाया जा सकता है. शाम होते तक बांस की बेंत फूल गयी और पानी का रिसना बहुत कम हो गया. उस बाल्टी से कुछ पानी ड्रम में डाला जा सका. रात होते तक पानी का ड्रम भर गया और उस चौथे व्यक्ति को राजा द्वारा सेनापति नियुक्त कर दिया गया.
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